इंदिरा दांगी की कहानियों में सामाजिक चेतना

लेखक

  • शिवानी सोनी (शोधार्थी, हिंदी विभाग) इं. गाँ. रा. ज.जा. वि.वि. अमरकंटक (म.प्र) ##default.groups.name.author##
  • डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह (आचार्य, हिंदी विभाग ) इं. गाँ.रा. ज.जा.वि.वि. अमरकंटक (म.प्र) ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67275/31x1t073

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आर्थिक विषमता##common.commaListSeparator## बेरोजगारी##common.commaListSeparator## यौन शोषण##common.commaListSeparator## भ्रष्टाचार##common.commaListSeparator## मध्यवर्ग##common.commaListSeparator## पर्यावरण

सार

हिंदी जगत की समकालीन लेखिका इंदिरा दांगी का लेखन विभिन्न विषयों को अपने अलग-अलग तरीके से पेश करता है | इंदिरा दांगी वर्तमान हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण आवाज़ हैं जो अपनी सशक्त लेखन शैली और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ के लिए जानी जाती हैं | इनकी कहानियों में दहेज़ प्रथा, नारी जीवन की विषमताओं, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक विपन्नता देखने को मिलती है | इन्होंने समाज की विभिन्न समस्याओं को अपने लेखन का विषय बनाकर साहित्य सृजन किया है | समकालीन लेखिका इंदिरा दांगी की समस्त कहानियों में सामाजिक चेतना प्रतिबिंबित होती है | इनकी कहानियाँ समाज के यथार्थ का सजीव चित्रण करती हैं | साहित्यकार किसी न किसी रूप में मनुष्य के जीवन में घटित घटनाओं, विडंबनाओं और उनकी समस्याओं का चित्रण अपनी रचनाओं के माध्यम से करता है | समकालीन कहानी की सबसे बड़ी विशेषता अपने परिवेश से गहराईयों से जुड़ना है | आज का रचनाकार उन समस्याओं से सीधा जूझता हुआ स्वयं अपने को उन परिस्थितियों के बीच खड़ा पाता है|

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प्रकाशित

2026-09-30

अंक

खंड

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