द्वितीय एवं विदेशी भाषा के रूप में हिदी की संयुक्त क्रिया के अधिगम में आगत समस्याएँ

लेखक

  • केशरी नंदन शोधार्थी (भाषाविज्ञान) डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67275/8afd6y41

सार

हिंदी की संयुक्त क्रिया संरचना एवं अर्थ की दृष्टि से विशिष्ट स्थान रखती है। हिंदी क्रिया में संयुक्त क्रिया के अभाव में विचारों को अभिव्यक्त करना दष्कर है। हिंदी क्रिया की संपूर्ण अभिव्यक्ति में संयुक्त क्रिया का प्रयोग बहुतायत होता है। हिंदी की भाषिक संरचना में संयुक्त क्रिया जटिलतम संरचनाओं में से एक है। इसकी अर्थगत सूक्ष्मता एवं विविधता अनुपम है। संयुक्त क्रिया की संरचना में दो क्रियाएँ एक साथ प्रयुक्त होती हैं, जिसमें प्रथम क्रिया या मुख्य क्रिया का अपना कोशीय अर्थ होता है तथा दूसरी क्रिया कोशीय अर्थ को छोड़कर पहले क्रिया के अर्थ को रंजित करती है, इसलिए इसे रंजक क्रिया भी कहते हैं। उदाहरण देखिए-

आज सुबह छह बजे उठ गया था।

मैंने उसका काम कर दिया है।

उपयुक्त उदाहरणों में पहले और दूसरे वाक्य में क्रमशः 'उठ गया' और 'कर दिया' संयुक्त क्रियाएँ हैं। पहले उदाहरण में क्रिया की पहली क्रिया 'उठ' अपने मूल या कोशीय अर्थ में वाक्य में प्रयुक्त हुई है तथा दूसरी क्रिया 'गयो' अपने मूल अर्थ को छोड़कर पहली क्रिया के अर्थ को रंजित करते हुए 'उठने का कार्य पूर्ण होने' के अर्थ को द्योतित कर रही है। इसी प्रकार दूसरे वाक्य में 'कर दिया' का अर्थ किसी दूसरे का कार्य संपन्न करने के अर्थ में है, जिसमें 'कर' अपने मूल अर्थ में तथा 'दिया' पहली क्रिया के अर्थ को पूर्णता प्रदान करती है। 'दिया' का प्रयोग इस संदर्भ में किसी दूसरे के कार्य को पूरा करने के अर्थ में हुआ है।

संयुक्त क्रिया का प्रयोग-हिंदी क्रिया में संयुक्त क्रिया का प्रयोग कितना अधिक होता है, इस संदर्भ में हिंदी कार्पोरा परियोजना, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के अंतर्गत विकसित कॉर्पस में 'निकलना' क्रिया के प्रयोग से देखा जा सकता है। 3 करोड़ कॉर्पस में 'निकलना' क्रिया का प्रयोग 18,307 हुआ है। इसका विवरण इस प्रकार है-

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प्रकाशित

2026-06-30

अंक

खंड

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