भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयाम
सार
भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए, इसके मूल सार को जानना ज़रूरी है। मानवीय चेतना का एक अहम और स्वाभाविक गुण ज्ञान की चाह है—ऐसा ज्ञान जिसमें *गुरु* (शिक्षक) से मिली सैद्धांतिक समझ के साथ-साथ अवलोकन या अनुभव से प्राप्त तथ्य, विचार और तार्किक समझ भी शामिल होती है। भारत का विशाल ज्ञान-भंडार एक ऐसी धारा है जो सदियों से लगातार बहती आ रही है और इस भूमि के आध्यात्मिक, भौतिक और बौद्धिक ताने-बाने में गहराई से रची-बसी है—एक ऐसी विरासत जिसने इस पवित्र धरती को *विश्व-गुरु* (दुनिया का शिक्षक) का सम्मान दिलाया।







