खड़ी बोली के साहित्य निर्माण में भारतेंदु हरिश्चंद्र की भाषाई नीति
सार
हिंदी साहित्य में आधुनिक युग की शुरुआत भारतेंदु युग से मानी जाती है। इस दौर से पहले साहित्य मुख्य रूप से पद्य और ब्रज बोली में लिखा जाता था, हालाँकि खड़ी बोली के शब्द भी कभी-कभी देखने को मिलते थे, क्योंकि तब तक खड़ी बोली आम लोगों की भाषा के तौर पर अपनी जगह बना चुकी थी। फिर भी, खड़ी बोली को अभी तक साहित्यिक भाषा के रूप में मान्यता नहीं मिली थी। इसे यह दर्जा सबसे पहले फोर्ट विलियम कॉलेज के माध्यम से मिला, जहाँ खड़ी बोली में शुरुआती गद्य रचनाएँ—मुख्य रूप से अनुवाद—प्रकाशित हुईं। इस संदर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा...







