सांप्रदायिकता के संदर्भ में असगर वजाहत के कथा-साहित्य : एक अद्ययन
सार
भारत एक ऐसा देश है जिसकी सामाजिक संरचना जटिल है। यहाँ सांप्रदायिकता से जुड़े मुद्दे नए नहीं हैं; अतीत से लेकर वर्तमान तक, सांप्रदायिक सोच सामाजिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गई है। आधुनिक भारत में, आज़ादी से पहले और बाद दोनों ही समय में, सांप्रदायिकता के और भी चिंताजनक रूप देखने को मिलते हैं।







