भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान प्रासंगिकता

लेखक

  • डॉ. प्रमोद पडवळ ##default.groups.name.author##

सार

भाषा का विकास और ज्ञान की परंपरा मानव सभ्यता के विकास में एक अहम पड़ाव है; ज्ञान की ऐसी परंपराओं का विकास सभी मानव समुदायों में देखा जा सकता है। भारत में भी ज्ञान की यह परंपरा हज़ारों सालों से चली आ रही है। इसने जीवन के नैतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया और सच्चाई, करुणा, क्षमा, शांति, विनम्रता और आत्मनिर्भरता जैसे मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी।

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प्रकाशित

2026-03-31

अंक

खंड

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