ट्रांसजेंडर जीवन का कसैला यथार्थ:श्रापित किन्नर

लेखक

  • डॉ. मेरली के पुनूस ##default.groups.name.author##

सार

आज के समय में, महिलाओं, दलितों और आदिवासियों की तरह ही ट्रांसजेंडर लोग भी समाज में अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इंसान होने के बावजूद, समाज उन्हें लगातार अधूरा महसूस कराता है; अधूरेपन का यह एहसास उनके जीवन को जीते-जी नर्क बना देता है।

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प्रकाशित

2025-09-30

अंक

खंड

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