स्त्री मन की व्यथा : 'लगता नहीं है दिल मेरा

लेखक

  • डॉ. खुशबू ##default.groups.name.author##

सार

कृष्णा अग्निहोत्री की आत्मकथा, *लगा नहीं है दिल मेरा*, पितृसत्तात्मक समाज में रहने वाली एक महिला के जीवन को दर्शाती है—एक ऐसी रचना जिसमें लेखिका ने हिम्मत के साथ अपने निजी अनुभवों को बयान करने की कोशिश की है। आत्मकथा की शुरुआत में ही वह लिखती हैं: "मेरी कहानी बिना किसी सजावट के, पूरी तरह स्वाभाविक... और पारदर्शी रहे! मेरे अनुभवों की परतें इस तरह खुलें कि उनकी बारीक-से-बारीक बात भी पाठक की समझ से बाहर न रहे। ज़िंदगी के धोखे और दिखावे के तूफ़ानों को झेलने के बावजूद, मेरी आत्मा उनसे अछूती रही... इस तरह मैं अपनी कहानी को ईमानदारी, विश्वसनीयता और सच्चाई के साथ पेश कर सकी।"

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प्रकाशित

2025-09-30

अंक

खंड

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