विभूति नारायण राय के उपन्यासों में यथार्थपरकता

लेखक

  • डॉ. सत्य प्रकाश पाण्डेय ##default.groups.name.author##

सार

आधुनिक साहित्य अपनी वैचारिक संवेदनाओं और मानवीय संदर्भों के कारण, कल्पना की अलौकिक दुनिया से हटकर भौतिक संसार की वास्तविकताओं पर केंद्रित होता है। समकालीन साहित्य का भी यही दृष्टिकोण है। मौजूदा संदर्भ में, समकालीन साहित्य का अर्थ 1990 के दशक के बाद रचे गए साहित्य से है; यह ऐसा लेखन है जो अपने समय से सीधे तौर पर जुड़ा होता है। लेखक आलोचनात्मक नज़रिए से समाज में मौजूद विसंगतियों और अंतर्विरोधों की पड़ताल करता है और उन्हें रचनात्मक अभिव्यक्ति देता है। इस संदर्भ में, कथा-आलोचक शंभू का कहना है—

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प्रकाशित

2025-03-31

अंक

खंड

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