शेखर जोशी की कहानियों में साहित्यिक सामाजिक अनुशीलन
सार
साहित्य समाज का दर्पण होता है। समाज के सुख-दुख, उसकी आशाएँ और निराशाएँ—वस्तुतः उसकी समस्त गतिविधियाँ—लेखक से अविच्छिन्न रूप से जुड़ी होती हैं। एक लेखक का परम उद्देश्य समाज का समग्र रूप से गहन अवलोकन और विश्लेषण करना होता है। इसी संदर्भ में शेखर जोशी का अवतरण होता है। उन्होंने मध्यम और निम्न वर्गों की जटिलताओं को अपनी कहानियों का केंद्रीय विषय बनाया। विभिन्न सामाजिक संदर्भों के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा, एक ऐसा बंधन जो उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।







