‘वसीयत’ उपन्यास में अभिव्यक्त वृद्धावास्था जनित अकेलापन, अलगावबोध और स्मृतियां

लेखक

  • पूजा यादव ##default.groups.name.author##

सार

बुढ़ापा मानवीय जीवन की एक गंभीर, जटिल और मानवीय समस्या है। औद्योगीकरण, शहरीकरण, वैश्वीकरण और पश्चिमी शिक्षा ने व्यक्तिवाद की भावना को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप परिवार का विघटन हुआ है और यह समस्या और भी विकराल रूप में सामने आई है।
उपन्यासकार डॉ. बरुज सिंह नेगी ने उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल की पृष्ठभूमि पर आधारित अपनी कृति की भावनात्मक संरचना की है।
स्विना इस उपन्यास की केंद्रीय पात्र है।

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प्रकाशित

2024-03-31

अंक

खंड

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