“सूरदास कृत ’भ्रमरगीत सार’ में उपालंभ काव्य एवं वात्सल्य वर्णन का आलोचनात्मक अध्ययन” (2026) Shodh Utkarsh, 4(15), pp. 64–65. doi:10.67275/z8sza843.