महिला लेखकों की कहानियों में अभिव्यक्त आर्थिक परिप्रेक्ष्य : दो हज़ार दस के बाद के संदर्भ में

Authors

  • अंजना .एम &डॉ.आर.जयचंद्रन Author

Abstract

आज़ादी के बाद से, जहाँ एक ओर हमारे देश ने निस्संदेह आर्थिक बदलाव देखे हैं, वहीं आज भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। चाहे कोई किसान हो या मज़दूर, आर्थिक तंगी उनके जीवन की गति में ही बाधा बन जाती है। कहानीकारों ने अपनी कहानियों के माध्यम से इस वास्तविकता के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया है। इस प्रकार, अर्थव्यवस्था समाज के भीतर एक केंद्रीय शक्ति के रूप में स्थापित है।

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Published

2023-12-31

How to Cite

महिला लेखकों की कहानियों में अभिव्यक्त आर्थिक परिप्रेक्ष्य : दो हज़ार दस के बाद के संदर्भ में. (2023). Shodh Utkarsh, 1(4), 78-79. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/94