समकालीन सामाजिक संदर्भ में प्रेमचंद की कहानियाँ: एक पुनर्व्याख्या

Authors

  • डॉ. आर. जयचंद्र आचार्य हिंदी विभाग, केरल विश्वविद्यालय तिरुवनंतपुरम, केरल Author

Abstract

यह लेख प्रेमजी के अनेक प्रमुख कार्यों का परत दर परत वर्णन करके उनके संपूर्ण लेखन को प्रदर्शित करने का प्रयास करता है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रेमजी को केवल एक लेखक कहना कितना निरर्थक है।

वास्तव में, प्रेमजी को किसी एक दायरे में या उनकी पूर्ण छवि में देखना व्यर्थ है।

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Published

2023-09-30

How to Cite

समकालीन सामाजिक संदर्भ में प्रेमचंद की कहानियाँ: एक पुनर्व्याख्या. (2023). Shodh Utkarsh, 1(3), 95-98. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/64

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