पुस्तक समीक्षा : ज़िदगी के रंग
DOI:
https://doi.org/10.67275/314bpq37Abstract
डॉ. किरण कुमारी ने अपने गज़ल संग्रह “ज़िंदगी के रंग” द्वारा हिंदी गज़ल लेखन की दुनिया में इंद्रधनुषी रंग के साथ जीवन के विविध आयामों को उकेर कर समाज की समकालीन चेतना को बड़ी बारीकी के साथ शब्दों में पिरोया है । डॉ. किरण कुमारी का यह गज़ल संग्रह “जिंदगी के रंग” (दिशा इंटरनेशनल पब्लिशिंग हाउस, 2020) समकालीन हिंदी गज़ल साहित्य के भंडार में एक ऐसे दीप्त रत्न के रूप में सुशोभित हो रहा है , जो मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक चेतना के विविध पहलुओं को अनेक रंगों में भर कर एक भाव संसार तैयार करता है।
यह संग्रह केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक विसंगतियों और आत्म-साक्षात्कार का एक जीवंत कोलाज है।इसमें प्रेम का माधुर्य भी है और विरह की टीस भी । समाज की विसंगतियों पर कटाक्ष है और बदलती दुनिया के प्रति गहरी चिंता भी। इन्होंने अपनी कलम से किसी काल्पनिक लोक की रचना नहीं की, बल्कि हमारे आसपास की धड़कती सच्चाई को स्वर दिया है। एक लेखिका के तौर पर डॉ. किरण कुमारी ने स्त्री जीवन के उन अनछुए पहलुओं को बहुत बारीकी से छुआ है, जो अक्सर पारंपरिक विमर्श में छूट जाते हैं। उनकी गज़लें स्त्री के अस्तित्व, उसके अधिकारों और उसकी अदम्य इच्छा शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।







