राजस्थानी लोक साहित्य में नारी जीवन की समस्याएं

Authors

  • प्रीति पारीक Author
  • पिंकी पारीक Author

Abstract

सांसारिक प्रक्रिया में जितना महत्व पुरूष का है, उतना ही, स्त्री का भी है। प्राचीन काल से ही नारी का सम्मान भारतीय सांस्कृतिक परम्परा का हिस्सा रहा है। नारी को नारायणी माना गया है। उसे गृहलक्ष्मी तथा जननी जैसे शब्दों से नवाजा गया है किंत् प्राचीन काल में नारी को जो सम्मान तथा स्थान प्राप्त था, वह वर्तमान में छिन्न-भिन्न सा प्रतीत होता है। नारी जीवन की अनेक समस्याएँ रही है। लोकसाहित्य में नारी के अनेक रूप उकेरे गये है उसे कन्या, पतिव्रता, विवाहिता, दासी, वेश्या, देवदासी, कुल्टा, कामणगारी, छिनाल, सती, साध्वी आदि अनेक नाम दिये गये हैं।

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Published

2024-06-30

How to Cite

राजस्थानी लोक साहित्य में नारी जीवन की समस्याएं. (2024). Shodh Utkarsh, 2(6), 65-66. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/366

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