'भोलाराम का जीव' में निहित प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सामाजिक विसंगति का आलोचनात्मक विश्लेषण

Authors

  • चित्रार्धनी पटेल Author

Abstract

यह रिसर्च पेपर मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की कालजयी रचना 'भोलाराम का जीव' के ज़रिए आज की प्रशासनिक व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और संवेदनशीलता की कमी का विश्लेषण करता है। यह अध्ययन इस बात पर रोशनी डालता है कि कैसे सरकारी तंत्र की पेचीदगियों में उलझकर एक आम नागरिक का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है।

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Published

2025-12-31

How to Cite

’भोलाराम का जीव’ में निहित प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सामाजिक विसंगति का आलोचनात्मक विश्लेषण. (2025). Shodh Utkarsh, 3(12), 98-98. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/355