दक्षिण भारत की मंदिर अर्थव्यवस्था का विश्लेषण

Authors

  • दिनेश कुमार Author

Abstract

दक्षिण भारत में मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं थे; वे आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र बन गए। चोल, पल्लव, पांड्य, चालुक्य और विजयनगर साम्राज्य जैसे राजवंशों ने इन मंदिरों को संरक्षण दिया और इन्हें कृषि, शिल्पकारी, व्यापार, श्रम प्रबंधन और सांस्कृतिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्रों में बदल दिया। यह शोध पत्र दक्षिण भारत की मंदिर-आधारित अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक तत्वों, आय-व्यय के तरीकों, प्रशासनिक ढांचे, सामाजिक प्रभाव, शिल्प विकास और व्यापार नेटवर्क के साथ-साथ इसके दीर्घकालिक ऐतिहासिक योगदान का विश्लेषण करता है। इसमें मंदिर अर्थव्यवस्था की सीमाओं और इसके पतन के कारणों पर भी चर्चा की गई है।

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Published

2025-12-31

How to Cite

दक्षिण भारत की मंदिर अर्थव्यवस्था का विश्लेषण . (2025). Shodh Utkarsh, 3(12), 78-79. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/346