आचलिक कथाकारों का हिंदी साहित्य में योगदान
Abstract
...[स्थानीय बोली]—जैसे कि "भैया, का टोला?" (भाई, कौन-सा टोला?)—और संवादों के इस्तेमाल से साहित्य को जीवंत बनाया। यह उपन्यास न केवल क्षेत्रीय साहित्य का प्रतीक है, बल्कि यह आज़ाद भारत की ग्रामीण सच्चाई को भी उजागर करता है।
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Published
2025-09-30
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Section
Articles
How to Cite
आचलिक कथाकारों का हिंदी साहित्य में योगदान . (2025). Shodh Utkarsh, 3(11), 99-100. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/311







