छायावादी काव्य में नवजागरण की चेतना और स्वतंत्रता की आकांक्षा

Authors

  • रवि कुमार झा Author

Abstract

छायावादी कविता में नवजागरण की चेतना और आज़ादी की चाह झलकती है। छायावाद का दौर सिर्फ़ आत्म-अभिव्यक्ति, सौंदर्य-बोध या रहस्यवाद तक ही सीमित नहीं था; यह राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक जागरूकता और औपनिवेशिक शासन के ख़िलाफ़ मानसिक प्रतिरोध की साहित्यिक अभिव्यक्ति भी थी। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा जैसे कवियों की रचनाओं में—व्यक्ति और आत्म-खोज पर ज़ोर के साथ-साथ—आज़ादी की लड़ाई के वैचारिक और सांस्कृतिक पहलुओं का उदय भी दिखाई देता है।

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Published

2025-09-30

How to Cite

छायावादी काव्य में नवजागरण की चेतना और स्वतंत्रता की आकांक्षा . (2025). Shodh Utkarsh, 3(11), 16-18. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/285