मालती जोशी की कहानियों में सामाजिक यथार्थ
Abstract
समाज एक-दूसरे से जुड़े इंसानों का समूह है, जिसमें इंसानी गतिविधियों का पूरा दायरा शामिल होता है। समाज में लगातार कई तरह की घटनाएँ होती रहती हैं; इन्हीं घटनाओं का वास्तविक चित्रण ही "सामाजिक यथार्थ" कहलाता है। सामाजिक यथार्थ की अवधारणा समय के साथ बदलती रहती है। हमारे समाज में होने वाली घटनाओं को साहित्य के माध्यम से भी पेश किया जाता है, क्योंकि साहित्य को अक्सर समाज का आईना कहा जाता है।







