अपनों के बीच में पराए हो जाने की पौड़ा की मार्मिक अभिव्यंजना

Authors

  • 'वापसी' कहानी - डॉ. प्रमोद पडवळ Author

Abstract

‘वापसी’—‘नई कहानी’ आंदोलन की एक प्रमुख हस्ती, उषा प्रियंवदा द्वारा लिखी गई एक कहानी—हिंदी साहित्य की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह कहानी संयुक्त परिवार व्यवस्था के विघटन को बयां करती है। ‘परिवार’ भारतीय सामाजिक ताने-बाने की मूल आधारशिला है; ‘वापसी’ इसी नींव के हिल जाने की कहानी है। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी के माध्यम से, जो रिटायरमेंट के बाद घर लौटता है, लेकिन फिर से उसे छोड़कर चला जाता है, उषा प्रियंवदा ने पारिवारिक रिश्तों के भीतर छिपी खोखली भावनात्मकता को अत्यंत मार्मिक ढंग से चित्रित किया है।

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Published

2024-09-30

How to Cite

अपनों के बीच में पराए हो जाने की पौड़ा की मार्मिक अभिव्यंजना. (2024). Shodh Utkarsh, 2(7), 49-51. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/168