मन्तू भंडारी के 'आपका बंटी' उपन्यास में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों का बिखराव एवं किशोरवय पर उसका दुष्प्रभाव
Abstract
मानव समाज की मूल इकाई परिवार है, जिसकी नींव किसी अकेले पुरुष या स्त्री में नहीं, बल्कि उन दोनों के मिलन में निहित है। उनके बीच का साथ और सामंजस्य ही पारिवारिक जीवन को बनाए रखता है, और समाज की प्रगति के लिए भावी पीढ़ियों के विकास को बढ़ावा देता है। सामाजिक विकास के इतिहास का अवलोकन करने पर यह पता चलता है कि, समय और स्थान की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप ढलते हुए, समाज विभिन्न कालों और विभिन्न संदर्भों में पुरुष-प्रधान रहा है।







