गांधीवादी राजनीतिक चिंतन और भारतीय अर्थव्यवस्था
Abstract
महात्मा गांधी का एकमात्र राजनीतिक सिद्धांत था—स्वराज।
यह संघर्ष केवल राजनीति तक सीमित नहीं था; बल्कि यह एक संपूर्ण दृष्टिकोण था।
इसमें अर्थव्यवस्था के साथ-साथ नैतिकता, मानव कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता की गहराई भी शामिल थी।
गांधीवादी सिद्धांत—जैसे स्वदेशी, स्वराज, न्याय सूत्र (न्यास-सिद्धांत), क्रांति और विकेंद्रीकृत ग्रामीण अर्थव्यवस्था—बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण, शोषण और उपभोक्तावाद का विरोध करते हैं।







