मैं द्रौपदी नहीं हूँ : नारी के अंतःकरण की वेदना

Authors

  • डॉ. प्रवीन कुमार Author

Abstract

मैं द्रौपदी नहीं हूँ' डॉ. ज्ञानी देवी का पहला लघुकथा संग्रह है।
इस संग्रह के माध्यम से हमें यह एहसास होता है कि—आज भी—एक स्त्री के जीवन की वास्तविकता में कोई खास बदलाव नहीं आया है। ठीक वैसे ही, जैसे बीते युगों में था; आज भी उसे महज़ एक दासी के रूप में ही देखा जाता है। जहाँ वैदिक काल में स्त्रियों का दर्जा अत्यंत ऊँचा था, वहीं दास वर्ग के उदय के साथ ही स्त्रियों की घरेलू और सामाजिक...

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Published

2024-03-31

How to Cite

मैं द्रौपदी नहीं हूँ : नारी के अंतःकरण की वेदना. (2024). Shodh Utkarsh, 2(5), 09-11. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/109