दलित कहानियों में संवेदनात्मक पक्ष, परिवर्तन और दिशा

Authors

  • डॉ. राजकुमारी Author

Abstract

किसी भी साहित्यिक विधा का मूल आधार मानवीय अनुभव में निहित होता है; यह इंद्रियों के माध्यम से ही है कि मनुष्य सुख और दुख—दोनों का बोध और अनुभव करता है। ठीक इसी अनुभव को उन्होंने ऐतिहासिक रूप से अपनी रचनात्मक कृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। हिंदी साहित्य कहानी कहने का एक समृद्ध और विस्तृत इतिहास समेटे हुए है—एक ऐसी परंपरा जिसमें कहानियाँ...

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Published

2024-03-31

How to Cite

दलित कहानियों में संवेदनात्मक पक्ष, परिवर्तन और दिशा . (2024). Shodh Utkarsh, 2(5), 06-09. https://shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/108