संविधान सभा में महिला सदस्यों के वैचारिक मतों का योगदान (1946-1950): एक ऐतिहासिक अध्ययन

Authors

  • शिवानी प्रजापति शोधार्थी, इतिहास विभाग, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश, भारत Author
  • अशोक अहिरवार विभाग-इतिहास, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश, भारत Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/b4045419

Keywords:

भारतीय संविधान सभा, संविधान, महिला सदस्य, वैचारिक मुद्दे, बहस, समानता, न्याय

Abstract

संविधान किसी भी देश की शासन व्यवस्था के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होता है भारतीय संविधान के निर्माताओं ने संविधान में राष्ट्र के आदर्श, उद्देश्यों की कार्यसिद्धि हेतु अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए और इन विचारों पर संविधान सभा में बहस की गई । अगर हम आदर्शों और उद्देश्यों की बात करें तो इनमें स्वतंत्रता, समानता, संघवाद, प्रतिनिधित्व, अस्पृश्यता का विरोध, लैंगिक न्याय, हिन्दू कोड बिल जैसे मुद्दे थे । हमारे भारतीय संविधान का निर्माण एक ऐसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हुआ जब भारत औपनिवेशिक शासको की जंजीरों से मुक्त होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभर रहा था । इन महिलाओं का संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम से शुरू होता है जहां महिलाओं ने अपनी साहसिकता और समर्पण से राजनीतिक चेतना अर्जित की, और संविधान सभा के गठन तक पहुंची जहा महिला सदस्यों ने अपने विचार, मुद्दे रखे और बहस भी की इन महिला सदस्यों ने भारत के भविष्य को आकार देने में अपना योगदान दिया । यह एक ऐसा दौर था जब सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक उथल-पुथल अपने चरम पर थी और महिला सदस्यों ने अपने अनुभवों के माध्यम से संविधान सभा मे अपने-अपने मुद्दे रखे महिलाओं की यही भागीदारी इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। संविधान निर्माण के दौरान पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की जिन्होंने आजादी के आंदोलनो में कदम से कदम मिलाकर अपनी सहभागिता को प्रदर्शित किया इन महिलाओं में एनी मैस्कारीन, हंसा जीवराज मेहता, दक्षायणी बेलायुधन, राजकुमारी अमृत कौर, अम्मू स्वामीनाथन के अलावा और भी महिलाएं थीं जिन्होंने संविधान निर्माण में अपनी अहम भूमिका अदा की। इन महिलाओं की संख्या और प्रभाव सीमित होने के बावजूद भी उनके योगदान ने संविधान को प्रगतिशील बनाए जो आज हर एक भारतीय नागरिक की जरूरत हो गई है।  इस पेपर का उद्देश्य नवनिर्मित भारत के निर्माण के लिए संविधान सभा में उपस्थित महिला सदस्यों के वैचारिक मतों का मूल्यांकन करते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों, सभा में रखे गए मुद्दे और उन मुद्दों पर हुई बहस को रेखांकित करना तथा इनके प्रयासों ने संवैधानिक प्रावधानों को कैसे और कहाँ तक प्रभावित किया ? महिलाओं की बहस के माध्यम से हुए प्रमुख परिवर्तनों की ऐतिहासिक समीक्षा को प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।

 

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Published

2026-03-31

How to Cite

संविधान सभा में महिला सदस्यों के वैचारिक मतों का योगदान (1946-1950): एक ऐतिहासिक अध्ययन. (2026). Shodh Utkarsh, 4(13), 133-137. https://doi.org/10.67275/b4045419

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