पंजाबी सूफ़ी काव्य परंपरा में बुल्ले शाह का योगदान सुष्मिता (शोधार्थी, हिंदी विभाग)

Authors

  • सुष्मिता (हिंदी विभाग) हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय धौलाधार परिसर -01, धर्मशाला Author
  • प्रो. चंद्रकांत सिंह (हिंदी विभाग) हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय धौलाधार परिसर -01, धर्मशाला Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/vvg3se38

Keywords:

पंजाब, साहित्य, बुल्ले शाह, काव्य, सूफी मत

Abstract

पंजाबी साहित्य हमेशा से लोकजीवन, प्रेम, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक संवेदना का प्रतिनिधित्व करता रहा है । पंजाब में रचित साहित्य केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसमें उस भूमि की संस्कृति, पीड़ा, संघर्ष और उसकी आकांक्षाओं का स्वर भी दिखाई पड़ता है । पंजाबी साहित्य में सूफ़ी परंपरा का एक अद्वितीय योगदान रहा है । सूफ़ी कवियों ने धार्मिक कर्मकण्ड से ऊपर उठकर प्रेम, मानवता और ईश्वरीय प्रेम के संदेश को सरल भाषा में व्यक्त किया । इस परंपरा में बुल्ले शाह का नाम सर्वाधिक प्रभावशाली और विशिष्ट माना जाता है । उनका काव्य न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के सामान्य जनमानस के मनोभावों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है । बुल्ले शाह ने अपने काव्य के माध्यम से पंजाबी साहित्य में सूफ़ी चेतना का सर्वोच्च रूप प्रस्तुत किया । उनके यहाँ प्रेम, विरह और विद्रोह केवल भाव नहीं, बल्कि सशक्त दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि है । पंजाबी साहित्य में बुल्ले शाह का स्थान इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि उन्होंने भाषा को जन-जन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया । उन्होंने उच्चकोटि के सूफ़ी दर्शन को लोकभाषा रूप में बदलकर सामान्य जनमानस की समझ और हृदय तक पहुँचाया । यही कारण है कि उनके काव्य को केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि गाया और अनुभव किया जाता है ।

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Published

2026-09-30

How to Cite

पंजाबी सूफ़ी काव्य परंपरा में बुल्ले शाह का योगदान सुष्मिता (शोधार्थी, हिंदी विभाग). (2026). Shodh Utkarsh, 4(15), 17-19. https://doi.org/10.67275/vvg3se38

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