'आपका बंटी' उपन्यास में स्त्रीत्व और मातृत्व का अंतर्द्वंद्व एवं संघर्ष

Authors

  • डॉ.पी.एम.आर. जयंती हिंदी- व्याख्याता एस.के.आर. एंड एस.के.आर. महिला शासकीय डिग्री महाविद्यालय (स्वायत्त) नागराजुपेटा, कड़प्पा (आंध्र प्रदेश) Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/s1gmty21

Keywords:

आपका बंटी, मन्नू भंडारी, स्त्रीत्व, मातृत्व, पितृसत्तात्मक, द्वंद्व, बाल-मनोविज्ञान, अस्तित्ववाद, आर्थिक स्वतंत्रता, पुनर्विवाह की त्रासदी, शकुन

Abstract

मन्नू भंडारी द्वारा लिखित 'आपका बंटी' (१९७१) हिंदी उपन्यास विधा का एक ऐसा मील का पत्थर है, जिसने समकालीन मध्यवर्गीय भारतीय समाज में पारिवारिक संस्था के विघटन और उससे उत्पन्न बाल-मनोविज्ञान के बिखराव को एक नई दिशा दी। परंतु, यह उपन्यास केवल बाल-मनोविज्ञान या दांपत्य-विघटन की कहानी मात्र नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में आधुनिक नारी के अस्तित्वगत संकट का एक अत्यंत जटिल आयाम निहित है—'स्त्रीत्व' और 'मातृत्व' का पारस्परिक और अपरिहार्य संघर्ष। प्रस्तुत शोध पत्र शकुन के चरित्र के माध्यम से इस बात का विश्लेषण करता है कि किस प्रकार एक आधुनिक, आर्थिक रूप से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर स्त्री जब अपने वैयक्तिक अस्तित्व (स्त्रीत्व) की रक्षा के लिए कदम उठाती है, तो उसका पारंपरिक मातृत्व किस प्रकार संकट में पड़ जाता है। पितृसत्तात्मक संरचना में 'माँ' को एक ऐसी अलौकिक, त्यागमयी और अमूर्त देवी के रूप में स्थापित किया जाता है जो अपनी वैयक्तिक इच्छाओं से रहित हो। जब शकुन अपनी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक आकांक्षाओं की पूर्ति हेतु पुनर्विवाह का मार्ग चुनती है, तो वह न केवल सामाजिक रोष का शिकार होती है, बल्कि उसका मातृत्व बंटी की मानसिक दुनिया को छिन्न-भिन्न कर देता है। यह शोध पत्र नारीवादी सिद्धांतांकन, सामाजिक-सांस्कृतिक संरचनाओं और पाठ्य-साक्ष्यों के आधार पर इस अनवरत द्वंद्व की मीमांसा करता है।

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Published

2026-06-30

How to Cite

’आपका बंटी’ उपन्यास में स्त्रीत्व और मातृत्व का अंतर्द्वंद्व एवं संघर्ष. (2026). Shodh Utkarsh, 4(14), 81–83. https://doi.org/10.67275/s1gmty21

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