बलवंत सिंह कि कहानियों में पंजाबी संस्कृति का प्रतिबिम्ब

Authors

  • Faiyaz Alam C 138 Second Floor Shaheen Bagh New delhi 110025 Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/SU.2026.041406

Abstract

बलवंत सिंह का जन्म जून 1921   गुजरावाला , पंजाब में हुआ  1937 से बलवंत सिंह ने कहानी लिखना शुरू किया  , उनकी रचनाएँ, इलाहबाद वह दिल्ली की पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई।  बलवंत सिंह की मुख्य कहानी संग्रह में  'जग्गा' , 'पहला पत्थर' , 'तार व् पौद' ,' हिंदुस्तान हमारा', 'पंजाब हमारा' , 'चिलमन' , और 'देवता का जन्म' का शुमार होता है तो दूसरी  तरफ उनके उपंन्यासों में 'रात चोर और चाँद' , ' एक मामूली लड़की', 'औरत और आबशार' , 'काले कोस' , 'रावी पार', और 'चाक्पीरां   का जस्सा' मुख्य हैं। बलवंत सिंह उर्दू  के उन् प्रमुख साहित्यकारों में से   एक हैं  जिन्होंने अपनी कहानियो से समाज  को एक  नयी दिशा देने का काम किया   उनकी कहानियों में पंजाब के गावँ की  जिवंत  तस्वीर देखने को मिलती है , उनके रचनाओं में पंजाब की ग्रामीण शैली , मेहनतकश अवाम , किसान , मजदूर  और आम लोगो की समस्याओं और उनकी भावनाओं का सजीव चित्रण बोल चाल की  भाषा में देखने को मिलता है. उनकी कहानियों में उर्दू और पंजाबी भाषाओं का सुन्दर संगम  देखने  को मिलता है  उनकी कहानियों और उपन्नियासो का सम्बन्ध पंजाब से है , पंजाब की मेहनतकश आवाम और कदम कदम पर उनके साथ होने वाले ज़ोर ज़बरदस्ती , डाकाजनी शिक्षा की कमी , लूट - खसोट और महिलाओं के  शोषण को बहुत खूबसूरती से अपने कहानियो में पेश किया है बलवंत सिंह की  सबसे अछि बात यह है कि वह  पंजाब में पैदा हुए और बहुत कम दिन वह  वहां रहें बावजूद इसके वह उमरभर पंजाब को भूल नहीं पाए , जिस तरह से उन्होंने पंजाब के खेत - खलियान , रहन- सहन , सांस्कृतिक विरासत का वर्णन किया है उससे उनके पंजाब से रूहानी लगाओ का हम् बखूबी अंदाजा लगा सकते हैं।  उन्हें उत्तर प्रदेश साहित्य अवार्ड , पटिआला सरकार  साहित्य अवार्ड और पंजाब सरकार शिरोमणि साहित्य अवार्ड से नवाज़ा गया

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Published

2026-06-30

How to Cite

बलवंत सिंह कि कहानियों में पंजाबी संस्कृति का प्रतिबिम्ब. (2026). Shodh Utkarsh, 4(14), 23-27. https://doi.org/10.67275/SU.2026.041406