भारत की विदेश नीति की बदलती गतिशीलता : चुनौतियाँ एवं भावी दिशा

Authors

  • डॉ. आर. एम. कुम्हार सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्‍सीलेंस, सं.गॉ.स्‍मृति शासकीय महाविद्यालय, सीधी, (म.प्र.) – 486661 Author

DOI:

https://doi.org/10.67275/q2p0bd02

Abstract

किसी भी देश की विदेश नीति उसके अन्य देशों के साथ पारस्परिक संबंधों को निर्धारित करती है। कोई भी राष्ट्र बिना विदेश नीति के न तो उन्नति कर सकता है और न ही अपने अस्तित्व को सुरक्षित रख सकता है। किसी राष्ट्र के लिए अपनी विदेश नीति का निर्धारण करते समय उसके राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है।

भारतीय विदेश नीति का उद्देश्य सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना तथा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए उनका संवर्धन करना है। इसके साथ ही यह लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुपक्षवाद, नागरिकों के सम्मान तथा मानवाधिकारों के संरक्षण पर विशेष बल देती है।

भारतीय विदेश नीति का प्रमुख लक्ष्य प्रारंभ से ही रंगभेद का विरोध करना, साम्राज्यवाद का प्रतिरोध करना, अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सद्भाव बनाए रखना तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का पालन करना रहा है। इसके अतिरिक्त यह गुटनिरपेक्षता तथा स्वतंत्रता आंदोलनों के समर्थन की नीति पर आधारित रही है। भारत की विदेश नीति पंचशील के सिद्धांतों से प्रेरित रही है।

भारत लंबे समय तक पराधीन रहने के पश्चात स्वतंत्र हुआ है, इसलिए स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा भारतीय विदेश नीति का अभिन्न अंग है। साथ ही बेरोजगारी, भूखमरी तथा जनसंख्या वृद्धि जैसी आंतरिक समस्याओं के समाधान हेतु विकसित देशों के साथ सहयोग स्थापित करना भी हमारी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

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Published

2026-03-31

How to Cite

भारत की विदेश नीति की बदलती गतिशीलता : चुनौतियाँ एवं भावी दिशा. (2026). Shodh Utkarsh, 4(13), 115-116. https://doi.org/10.67275/q2p0bd02